भवाली में 1920 से शुरू हुआ था रामलीला मंचन,1980 में जिला स्तर पर तीन बार कमेटी ने जीता था पदक

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-1980 में जिला स्तर पर तीन बार कमेटी ने जीता था पदक

भवाली। रामलीला सम्पूर्ण भारतीय दर्शन को समाहित किये हुवे हैं। हम इसके मंचन से भारतीय संस्कृति के साथ इसको संरक्षित करने का कार्य भी कर रहे हैं। रामलीला का हिन्दू धर्म में अपना खास महत्व हैं। मर्यादा पुरुषोत्तम राम की जीवन लीला रामचरितमानस में समाई हैं। जो मानव को मर्यादा व सत्य के मार्ग पर चलना सिखाती हैं। रामलीला की बात आते ही आज भी घरों में बच्चे, बड़े, बूड़ो के चहरे खिल उठते हैं।
इस वर्ष 106 साल भवाली की रामलीला को हो जाएंगे। वर्तमान रामलीला कमेटी अध्यक्ष बालम सिंह मेहरा ने बताया कि नगर के परमालाल साह ने 1920 में रामलीला का शुभारंभ किया था। जिसके बाद परमालाल साह ट्रस्ट की स्थापना भी की गई। जिससे नगर में रामलीला की बुनियाद पड़ी। उस समय पंत स्टेट में रामलीला का आयोजन होता था। परमालाल साह के बाद रामलीला को रामदत्त अमीन, हीरा लाल साह, प्रेम सिंह,पान सिंह ने आगे बढ़ाया। बताया कि रामलीला का मंचन होने से कई गाँवो के लोग रामलीला देखने पहुँचते थे। जिससे हर साल रामलीला का आकर्षक रूप बढ़ता गया। समय के साथ पौराणिक देवी मंदिर के पास छोटे मैदान में रामलीला होने लगी। टेलीविजन मनोरंजन के साधन नहीं होने से रामलीला लोगों को अपनी तरफ लुभाती रही। 1950 से 1960 के दशक तक रामलीला की बागडोर प्रेमलाल साह, बंशीधर कंशल, पद्मादत ने संभाली थी। 1960 के बाद रामलीला का स्वर्णिम युग शुरू हुआ। उस समय रामलीला कमेटी के अध्यक्ष हरिदत्त सनवाल रहे। डेढ़ दशक तक उन्होंने कार्यभार सँभाला। उन्होंने रामलीला को नई उचाईयों में पहुँचाया। सतीश लाल साह, नंदा बल्लभ सुयाल जैसे कलाकार उस दौर में उभर कर सामने आए। देवराम हारमोनियम मास्टर उस दौर में सक्रिय रहे। पू बताया कि 1980 के दशक में जिला स्तर में रामलीला प्रतियोगिता आयोजित की जाती थी। भवाली की टीम ने लगातार तीन बार पदक जीत कर जिले में अपना रिकार्ड बनाया था। उस दौरान रामलीला की बागड़ोर सतीश लाल साह, शेखर भगत, रवि शंकर जोशी, प्रकाश बिनवाल, नंदा बल्लभ सुयाल के हाथों में थी। 1990 में कुछ वर्ष रामलीला नही हुई। 2001 में फिर मंचन शुरू किया गया। 2003 में हरिशंकर कंशल कमेटी के अध्यक्ष चुने गए। 2007 में नई कमेटी का गठन कर मोहन बिष्ट रहे। कमेटी अध्यक्ष बालम सिंह मेहरा ने बताया कि रामलीला के बढ़ते स्वरूप को देखते हुवे 2011 में पालिका मैदान में मंचन शुरू किया गया। जिसके बाद 2015 में स्थायी मंच बना। जिसमें 2 हजार से अधिक लोग बैठकर रामलीला देखते हैं। उन्होंने बताया कि इस वर्ष रविवार 11 अक्टूबर से रामलीला मंचन शुरू होगा।

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