भूसे पर रोक, जिलाधिकारी ने जारी किए निर्देश
नैनीताल। पशुओं के चारे के रूप में उपयोग होने वाले भूसे की कीमतों में लगातार हो रही वृद्धि को देखते हुए जिलाधिकारी ने जिले में भूसे के अनावश्यक भंडारण और राज्य से बाहर परिवहन पर रोक लगाने के आदेश जारी किए हैं।
जिलाधिकारी ने बताया कि उत्तराखंड में पशुपालक मुख्य रूप से गेहूं के भूसे का उपयोग सूखे चारे के रूप में करते हैं। अप्रैल के दूसरे पखवाड़े और मई माह में गेहूं की कटाई के बाद भूसे की उपलब्धता अधिक रहती है, इसी दौरान पशुपालक और गोसदन अपनी जरूरत के अनुसार भूसा खरीदकर संग्रहित करते हैं। लेकिन कुछ व्यापारियों द्वारा बड़े पैमाने पर भूसा जमा किए जाने की संभावना रहती है, जिससे भविष्य में चारे की कमी और कीमतों में वृद्धि की स्थिति पैदा हो सकती है।
उन्होंने कहा कि भूसे की कमी होने पर पशुपालकों द्वारा पशुओं को छोड़ने की आशंका रहती है, जिससे सड़कों पर निराश्रित पशुओं की संख्या बढ़ने के साथ ही यातायात और कानून व्यवस्था की समस्या उत्पन्न हो सकती है।
जिलाधिकारी ने जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, मुख्य विकास अधिकारी, नगर आयुक्त हल्द्वानी, सभी उपजिलाधिकारियों और नगर निकायों के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि भूसे के अवैध भंडारण और कालाबाजारी पर प्रभावी रोक लगाई जाए।
आदेश के तहत आगामी 15 दिनों तक भूसे का उपयोग ईंट भट्टों और अन्य उद्योगों में करने तथा इन उद्योगों को भूसा बेचने पर रोक रहेगी। साथ ही जिले में उत्पादित भूसे को राज्य से बाहर ले जाने पर भी तत्काल प्रभाव से 15 दिनों के लिए प्रतिबंध लगाया गया है।
जिलाधिकारी ने पुआल जलाने पर भी तत्काल रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों को आदेशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराने को कहा है।
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