विश्व हिमालय ग्लेशियर दिवस 21 मॉर्च को मनाये जाने को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजा पत्र

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भवाली। भारत तिब्बत सहयोग मंच प्रकृति संरक्षण प्रकोष्ठ राष्ट्रीय संयोजक प्रीति सागर गर्ग ने प्रधानमंत्री नरेंद मोदी व मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र लिख 21 मॉर्च को विश्व हिमालय संरक्षण दिवस मनाने की मांग की है। उन्होंने पत्र लिख कहा है कि भारत का गौरव हिमालय को पृथ्वी का तीसरा ध्रुव कहा जाता है। जिसे हिंदू कुश काराकोरम हिमालय प्रणाली एककेकेएच के रूप में भी जाना जाता है, जो तिब्बती पठार के पश्चिम और दक्षिण में स्थित एक पहाड़ी क्षेत्र है। यह बड़े ग्लेशियरों, पर्माफ्रॉस्ट और भारी बर्फ की भूमि, पठार नदियों के एक विशाल नेटवर्क को पोषण देता है, जिसमें गंगा, सिंधु, मेकांग, यांग्त्ज़ी और येलो जैसे प्रमुख जलमार्ग शामिल हैं। आगे कहा कि भारत के हिमालय क्षेत्र में 9527 ग्लेशियर हैं। इनमें से 3600 ग्लेशियरों का एक बड़ा भाग उत्तराखंड में है। उत्तराखंड के 19 ग्लेशियर दुनियाभर में प्रसिद्ध हैं। किंतु पिछले कुछ सालों में बढ़ती ग्लोबल वार्मिंग के चलते ग्लेशियर पिघलने लगें हैं। यदि ग्लेशियर इसी तरह पिघलते रहे तो कुछ दशकों में गंगा, ब्रह्मपुत्र और सिंधु जैसी नदियां मौसमी नदियां बनने की कगार पर आ जायेंगी। कहा निकट भविष्य में भीषण जल संकट की स्थिति आ जायेगी। उन्होंने कहा कि हिमालय क्षेत्र में आने वाले उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर एवं पिथौरागढ़ जिले के प्रमुख ग्लेशियरों को राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया जाए साथ ही नैनीताल के भीमताल क्षेत्र में “हिमालय विकास प्राधिकरण” का भी निर्माण करवाया जाये।
कहा नैनीताल का क्षेत्र स्नोलाइन और ट्री लाइन के मध्य ग्रीन लाइन क्षेत्र के पहाड़ी बुग्याल का पड़ता है, जहां प्रकृति प्रदत्त वृक्ष भौगोलिक स्थिति के अनुसार उत्पन्न होते हैं, पहाड़ों को बांध कर रखते हैं। किंतु छूट प्रजाति के वृक्षों की कटाई के कारण कई किमी के क्षेत्र के वृक्षों की कटाई हो जाती है। अधिकांश वृक्ष छूट प्रजाति के होते हैं। यदि पांच किमी के स्थान पर पांच सौ पेड़ों में से तीन सौ पेड़ छूट प्रजाति के हैं और दो सौ पेड़ बिना छूट के हैं तो उस स्थान पर कटाई कर दी जाये तो मात्र दो सौ पेड़ ही रह जायेंगे। नये पौधे को पुनः वृक्ष बनने में बीस पच्चीस वर्ष लग जाते हैं तब तक उस स्थान का पर्यावरण तंत्र बुरी तरह से प्रभावित हो चुका होता है। इन छूट प्रजाति वृक्षों में कई वृक्ष पचास वर्ष से सौ वर्ष पुराने भी होते हैं जिनको काटने पहाड़ों का पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित हो रहा है। छूट प्रजाति के वृक्षों को काटने से पुर्व स्थान का निरिक्षण, वृक्ष की आयु एवं भौगोलिक स्थिति की भी सम्पूर्ण जांच का दिशानिर्देश जारी करवाया जाये। पहाड़ों की अवैध रूप से कटाई, खनन एवं दोहन पर भी रोक लगाई जाए। कह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक इंद्रेश कुमार के मार्गदर्शन एवं राष्ट्रीय महामंत्री मंत्री पंकज गोयल के नेतृत्व में भारत तिब्बत- सहयोग मंच पिछले छब्बीस वर्षों से तिब्बत की स्वतंत्रता, कैलाश मानसरोवर की मुक्ति,भारत की सुरक्षा, चीन की वस्तुओं का बहिष्कार एवं पर्यावरण के केंद्र बिंदु हिमालय की सुरक्षा के लिए कटिबद्ध है। उत्तराखंड एवं भारत में प्रकृति संरक्षण अभियान को गति देते हुए आगामी 21 मार्च 2025′ को “विश्व हिमालय ग्लेशियर संरंक्षण दिवस” के रूप घोषणा होनी चाहिए। प्रीतिसागर गर्ग पिछले तीस वर्षों से बेहतर समाज व सतत् विकास की प्रक्रिया हेतु प्रकृति एवं जीव जंतुओं के संरक्षण की दिशा में निरंतर कार्य कर रही हैं।

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